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About Founder

Miss Gunja Singh

फाउंडर का संदेश 


हमारी संस्था का मूल उद्देश्य भारतीय संविधान में निहित समानता, गरिमा और न्याय के मूल्यों को ज़मीन पर उतारना है। हम समाज के उन सभी वर्गों के साथ कार्य करते हैं जो ऐतिहासिक रूप से वंचित, शोषित और हाशिये पर रहे हैं—जिनमें महिलाएँ, दलित, अत्यंत पिछड़े वर्ग, और अन्य सामाजिक रूप से उपेक्षित समुदाय शामिल हैं।
लेकिन हमारे इस सामाजिक सफर में ट्रांसजेंडर (टीजी) समुदाय एक विशेष स्थान रखता है। इसकी वजह कोई आंकड़ा या रिपोर्ट नहीं, बल्कि एक ऐसी घटना है जिसने हमें भीतर तक झकझोर दिया।
एक बार यात्रा के दौरान आजमगढ़ बस स्टेशन पर हमने देखा कि ट्रांसजेंडर समुदाय के कुछ लोग शौचालय का उपयोग करना चाहते थे, लेकिन उन्हें वहाँ मौजूद व्यक्ति द्वारा रोका गया। महिला शौचालय में जाने पर भी मना किया गया और पुरुष शौचालय में भी प्रवेश नहीं मिला।
यह घटना मेरे सामने घटित हो रही थी। मैंने और मेरे साथियों ने टीजी समुदाय के समर्थन में आवाज़ उठाई। बात बढ़ी, विवाद हुआ, रोडवेज के आरएमएस तक मौके पर पहुँचे। काफी प्रयास और संघर्ष के बाद ही उन्हें शौचालय का उपयोग करने दिया गया।
उस क्षण मुझे यह गहराई से महसूस हुआ कि यह केवल एक शौचालय का सवाल नहीं था—यह मानव गरिमा, पहचान और अधिकार का प्रश्न था। अगर सार्वजनिक सुविधाओं के उपयोग में ही इतना भेदभाव है, तो टीजी समुदाय रोज़मर्रा के जीवन में कितना अपमान और अन्याय झेलता होगा।
यही घटना हमारे लिए निर्णायक मोड़ बन गई। हमने उसी दिन यह संकल्प लिया कि यदि अवसर मिला, तो हम ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों, सम्मान के लिए पूरी तरह समर्पित होकर  कार्य करेंगें।


जब मेरा चयन साथी फेलोशिप (अयोध्या) के लिए हुआ, तो हमने बिना किसी देरी के टीजी समुदाय को अपना कार्यक्षेत्र चुना। यह केवल एक चयन नहीं था, बल्कि उस दिन लिए गए संकल्प को वास्तविक कार्यों में बदलने का निर्णय था। हमने तय किया कि अब शब्दों से ज्यादा, काम और अनुभवों के माध्यम से उनके साथ खड़े रहेंगे।
हमने छोटे-छोटे ग्रुप बनाए, उनके साथ बैठ कर उनकी ज़िंदगी की चुनौतियों, अनुभवों और दर्द को समझा, उनके जीवन को बहुत करीब से देखा और उनकी तकलीफों को गहराई से महसूस किया, उनकी कहानियों को सुना, उनके अधिकारों और गरिमा के लिए जागरूकता और सशक्तिकरण के अभियान चलाए। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और समाज में समान अवसरों पर चर्चा की। हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे, उनके अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए ठोस पहल की।
यह यात्रा हमारे लिए केवल “काम करने” की नहीं थी; यह टीजी समुदाय के साथ हाथ में हाथ डालकर चलने, उनके अनुभवों को साझा करने और उनके अधिकारों के लिए पूरी तरह समर्पित रहने का निर्णय बन गई।

हमने देखा कि बदलाव तभी संभव है जब उनके संघर्षों को समझा जाए और उनके साथ मिलकर कदम बढ़ाए जाएँ। यही हमारा संदेश है — सिर्फ सपनों में नहीं, बल्कि हर दिन की मेहनत और हर छोटे - छोटे प्रयास से बदलाव लाना।
इस संस्था ने संवैधानिक मूल्यों की मजबूती के लिए सभी वंचित और शोषित समुदायों के साथ काम शुरू किया, लेकिन विशेष रूप से टीजी समुदाय के साथ, क्योंकि हमने भेदभाव को अपनी आंखों से देखा और उसे चुपचाप स्वीकार करना असंभव था।
आज हमारी संस्था मानती है कि जब तक समाज के हाशिए पर खड़े व्यक्ति को सम्मान और अधिकार नहीं मिलते, तब तक संविधान का अर्थ अधूरा है। हमारा प्रयास है एक ऐसा समाज बनाना, जहां हर व्यक्ति — चाहे वह महिला हो, दलित हो, वंचित हो या ट्रांसजेंडर — अपने अधिकारों के साथ, बिना डर और भेदभाव के जीवन जी सके।
संस्थापक