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About Us

Welcome to Satrangi Foundation

सतरंगी फाउंडेशन मऊ एक ऐसी सामाजिक संस्था है जो सभी वंचित, शोषित और हाशिए पर खड़े समुदायों के अधिकार, सम्मान और सशक्तिकरण के लिए समर्पित है।
संस्था विशेष रूप से ट्रांसजेंडर (TG) समुदाय के अधिकार, पहचान और सामाजिक स्वीकृति को लेकर कार्य करती है।
हमारा विश्वास है कि विविधता ही समाज की असली सुंदरता है — और समानता केवल संविधान की पंक्तियों में नहीं, बल्कि लोगों की सोच और व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए।

सतरंगी फाउंडेशन मऊ का सपना

सतरंगी फाउंडेशन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक सोच है — समानता, सम्मान और स्वीकृति की सोच।
यह उस विश्वास पर आधारित है कि हर इंसान, चाहे उसकी पहचान, लिंग, या परिस्थिति कुछ भी हो, सम्मान और अवसरों का समान हकदार है।

हमारा सपना है एक ऐसा समाज बनाना जहाँ किसी को अपनी पहचान छिपानी न पड़े,
जहाँ ट्रांसजेंडर समुदाय, महिलाएँ, विधवाएँ, वंचित और शोषित वर्ग अपनी पूरी गरिमा और आत्मविश्वास के साथ जीवन जी सकें।

हम एक ऐसे भारत की कल्पना करते हैं —
जहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और न्याय के द्वार सबके लिए खुले हों;
जहाँ संवेदना, समझ और स्वीकृतिता समाज की मूल भावना बने;
और जहाँ हर रंग, हर पहचान मिलकर एक “सतरंगी समाज” का निर्माण करें — जो विविधता में एकता का सबसे सुंदर उदाहरण हो।

सतरंगी फाउंडेशन का विश्वास है कि बदलाव केवल नीतियों से नहीं, बल्कि मानवता और संवेदना से आता है।
इसलिए हम शिक्षा, संवाद और संवैधानिक मूल्यों के प्रचार के माध्यम से समाज में वह वातावरण बना रहे हैं,
जहाँ हर व्यक्ति अपने अस्तित्व पर गर्व कर सके।

हमारा उद्देश्य है — पहचान नहीं, इंसानियत देखी जाए।
हमारा सपना है — हर रंग को सम्मान मिले और सब मिलकर सतरंगी इंद्रधनुष बनें।

सतरंगी फाउंडेशन मऊ उसी सतरंगी सोच का प्रतीक है।


Our Core Belief — हमारा विश्वास

सतरंगी फाउंडेशन मझ का मूल विश्वास इस बात में है कि हर इंसान सम्मान, गरिमा और समान अवसर का अधिकारी है —
चाहे उसका लिंग, पहचान या जीवन की परिस्थितियाँ कुछ भी हों।

हम मानते हैं कि समाज की असली प्रगति और विकास तभी संभव है जब हाशिए पर खड़े वंचित, शोषित, विशेषकर ट्रांसजेंडर समुदाय को
गरिमा और अपनी पहचान के साथ सम्मानपूर्वक जीने, समाज में बराबरी से रहने और आगे बढ़ने का अवसर व अधिकार मिले।


हमारा विश्वास यह है कि —

ट्रांसजेंडर व्यक्ति भी समाज की ताकत हैं, बोझ नहीं।
वे केवल “अलग” नहीं, बल्कि अद्वितीय हैं — और उन्हें समान सम्मान, शिक्षा व अवसर मिलना चाहिए।

समानता केवल कानून में नहीं, व्यवहार में होनी चाहिए।
हर व्यक्ति को यह महसूस होना चाहिए कि वह समाज का अभिन्न हिस्सा है, न कि बाहर खड़ा दर्शक।

मानवता सबसे बड़ा धर्म है।
जब हम भेदभाव छोड़कर हाथ थामते हैं, तभी सच्चे अर्थों में समाज आगे बढ़ता है।

साक्षरता और जागरूकता ही सशक्तिकरण की नींव हैं।
ज्ञान और संवेदनशीलता से ही हम हर व्यक्ति को आत्मनिर्भर और सम्मानित बना सकते हैं।

संवाद, संवेदना और सहयोग से बदलाव संभव है।
स्कूल, कॉलेज, पंचायत, संस्थाएँ — जब सब एक मंच पर आएँ, तभी सच्ची समावेशिता बनती है।

हमारा विश्वास है कि हर टीजी की मुस्कान हर वंचित व्यक्ति की आशा और हर इंसान का आत्मविश्वास यही सतरंगी समाज की असली पहचान है।